शेयर बाजार में फिर बड़ी गिरावट, सेंसेक्स 700 अंक से ज्यादा टूटा — जानिए पूरा कारण
मंगलवार, 12 मई 2026 को भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन भारी बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार से ही बाजार दबाव में रहा और दिन चढ़ने के साथ गिरावट और गहरी होती गई। निवेशकों में डर और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है।
बाजार का हाल
• बीएसई सेंसेक्स लगभग 713 अंक टूटकर 75,301 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।
• एनएसई निफ्टी करीब 191 अंक गिरकर 23,624 के आसपास पहुंच गया।
• सुबह बाजार खुलते ही कमजोरी दिखी थी:
o सेंसेक्स 326 अंक टूटकर 75,688 पर खुला।
o निफ्टी 93 अंक गिरकर 23,723 पर खुला।
सबसे ज्यादा दबाव IT सेक्टर में देखने को मिला।
बड़े आईटी शेयरों में तेज बिकवाली हुई:
• Tata Consultancy Services (TCS)
• Infosys
• HCL Technologies
इन कंपनियों के शेयरों में 3% से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
बाजार क्यों गिरा?
1. अमेरिका–ईरान तनाव से बढ़ी चिंता
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने दुनियाभर के निवेशकों को डरा दिया है। मध्य-पूर्व में संघर्ष बढ़ने की आशंका से वैश्विक बाजारों में बेचैनी बढ़ गई है।
निवेशकों को डर है कि अगर हालात और बिगड़े तो तेल सप्लाई प्रभावित हो सकती है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर पड़ेगा।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
भू-राजनीतिक तनाव का सबसे बड़ा असर क्रूड ऑयल पर दिखा।
• ब्रेंट क्रूड बढ़कर लगभग 104.87 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया।
• अमेरिकी WTI क्रूड भी करीब 98.56 डॉलर प्रति बैरल तक चढ़ गया।
भारत जैसे तेल आयात करने वाले देश के लिए यह चिंता की बात है, क्योंकि महंगा तेल:
• महंगाई बढ़ाता है,
• रुपये पर दबाव डालता है,
• और कंपनियों की लागत बढ़ा देता है।
इसी कारण निवेशकों ने शेयर बाजार में बिकवाली तेज कर दी।
रुपया कमजोर, विदेशी निवेशक बेच रहे शेयर
भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले दबाव में बना हुआ है।
हालांकि 11 मई को रुपया कुछ मजबूत होकर 95.31 पर बंद हुआ था, लेकिन इससे पहले यह रिकॉर्ड निचले स्तर 95.62 तक पहुंच चुका था।
रुपये की कमजोरी से विदेशी निवेशक (FIIs) भारतीय बाजार से पैसा निकाल रहे हैं। जब विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली करते हैं, तो बाजार पर भारी दबाव बनता है।
पीएम मोदी की अपील का असर
रिपोर्ट्स के अनुसार प्रधानमंत्री Narendra Modi ने लोगों से पेट्रोलियम उत्पादों का समझदारी से इस्तेमाल करने और कुछ समय तक सोने की खरीद टालने की अपील की है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भी निवेशकों की भावनाओं पर असर पड़ा और बाजार में सावधानी बढ़ी।
एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख
दिलचस्प बात यह रही कि भारतीय बाजार गिरावट में रहा, जबकि कई एशियाई बाजार मजबूती के साथ खुले।
जापान
• Nikkei 225 में लगभग 0.2% की बढ़त
• टॉपिक्स इंडेक्स 0.54% ऊपर
दक्षिण कोरिया
• KOSPI में 2% से ज्यादा तेजी
• कोस्डैक इंडेक्स भी मजबूत रहा
ऑस्ट्रेलिया
• S&P/ASX 200 लगभग सपाट कारोबार करता दिखा।
अमेरिकी बाजारों में रिकॉर्ड तेजी
सोमवार के कारोबार में अमेरिकी बाजार मजबूत बंद हुए।
• S&P 500 0.19% चढ़ा
• Nasdaq Composite ने नया रिकॉर्ड हाई बनाया
• Dow Jones Industrial Average भी बढ़त के साथ बंद हुआ
हालांकि अमेरिकी बाजारों की मजबूती का असर भारतीय बाजार पर नहीं दिखा, क्योंकि घरेलू निवेशकों का फोकस फिलहाल तेल कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव पर ज्यादा है।
डॉलर इंडेक्स में मजबूती
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY) बढ़कर 98.01 पर पहुंच गया।
डॉलर मजबूत होने से उभरते बाजारों (Emerging Markets) से निवेश निकलने लगता है, जिसका असर भारत जैसे देशों पर भी पड़ता है।
आगे क्या रहेगा फोकस?
आने वाले दिनों में बाजार की दिशा इन बातों पर निर्भर करेगी:
1. अमेरिका–ईरान तनाव कितना बढ़ता है
2. कच्चे तेल की कीमतें कहां तक जाती हैं
3. विदेशी निवेशकों की बिकवाली रुकती है या नहीं
4. रुपये की स्थिति कैसी रहती है
5. वैश्विक बाजारों का रुख
अगर क्रूड ऑयल 100 डॉलर के ऊपर लंबे समय तक बना रहता है, तो भारतीय बाजार में और दबाव देखने को मिल सकता है।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे समय में घबराहट में फैसले लेने से बचना चाहिए। बाजार में उतार-चढ़ाव फिलहाल वैश्विक कारणों से बढ़ा हुआ है।
• लंबी अवधि के निवेशक मजबूत कंपनियों पर नजर बनाए रखें।
• अत्यधिक जोखिम वाले शेयरों से सावधानी बरतें।
• IT और तेल पर निर्भर सेक्टरों में दबाव जारी रह सकता है।
फिलहाल बाजार में डर और अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है, इसलिए अगले कुछ कारोबारी सत्र काफी अहम माने जा रहे हैं।







