चुनाव के 24 दिन बाद महंगाई की मार: पेट्रोल-डीजल से खाने के तेल तक बढ़े दाम, अभी और राहत दूर
5 राज्यों के चुनावी नतीजों के कुछ ही दिनों बाद देश में महंगाई ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। पेट्रोल-डीजल, CNG, कमर्शियल LPG सिलेंडर और खाने के तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। पिछले चार साल से स्थिर रहे ईंधन दामों में अचानक तेजी आने से लोगों के घरेलू बजट पर सीधा असर पड़ रहा है।
पेट्रोल-डीजल: चार साल बाद लगातार बढ़ोतरी
करीब चार साल तक स्थिर रहने के बाद 15 मई 2026 से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी शुरू हुई। बीते 10 दिनों में चार बार दाम बढ़ाए जा चुके हैं। 25 मई को पेट्रोल 2.61 रुपये प्रति लीटर और डीजल 2.71 रुपये प्रति लीटर महंगा हुआ।
ताजा बढ़ोतरी के बाद दिल्ली में पेट्रोल 102.12 रुपये प्रति लीटर और डीजल 95.20 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया है।
इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह पश्चिम एशिया में बढ़ता भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊपर बनी हुई हैं। सरकार ने कुछ समय तक वैश्विक महंगाई का असर जनता तक पहुंचने से रोकने की कोशिश की, लेकिन सरकारी तेल कंपनियों को भारी घाटा उठाना पड़ा।
सूत्रों के मुताबिक तेल कंपनियों को एक समय रोजाना करीब 1,000 करोड़ रुपये तक का नुकसान हो रहा था। हालिया बढ़ोतरी के बाद भी यह घाटा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
LPG सिलेंडर: घरेलू उपभोक्ताओं को राहत, व्यापारियों पर बोझ
घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत मिली हुई है। 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू LPG सिलेंडर की कीमत में कोई बदलाव नहीं किया गया है और दिल्ली में इसकी कीमत 913 रुपये बनी हुई है।
हालांकि होटल, ढाबा और रेस्तरां चलाने वालों के लिए स्थिति मुश्किल हो गई है। 1 मई 2026 से 19 किलो वाले कमर्शियल गैस सिलेंडर की कीमत में 993 रुपये की भारी बढ़ोतरी की गई। इसके बाद दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर का दाम 3,071.50 रुपये पहुंच गया।
इसका असर बाहर खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर भी पड़ सकता है।
CNG: दो हफ्ते में चौथी बढ़ोतरी
पेट्रोल-डीजल की महंगाई से बचने के लिए जिन लोगों ने CNG वाहन अपनाए थे, उन्हें भी अब राहत नहीं मिल रही।
26 मई 2026 को CNG की कीमत में फिर 2 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई। पिछले दो हफ्तों में यह चौथी वृद्धि है। दिल्ली में CNG का दाम बढ़कर 83.09 रुपये प्रति किलो हो गया है।
15 मई के बाद से अब तक CNG करीब 6 रुपये प्रति किलो महंगी हो चुकी है। NCR के कई इलाकों जैसे नोएडा, गाजियाबाद और ग्रेटर नोएडा में इसकी कीमत 91.70 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई है।
खाने का तेल भी महंगा होने की तैयारी में
महंगाई का असर अब रसोई तक साफ दिखाई देने लगा है। खाद्य तेल कंपनियां मई महीने में ही 5 से 10 प्रतिशत तक कीमतें बढ़ाने की तैयारी में हैं। इससे पहले भी कंपनियां पिछले महीनों में 8 से 20 रुपये प्रति लीटर तक दाम बढ़ा चुकी हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने पर बायोफ्यूल की मांग बढ़ जाती है। ऐसे में खाद्य तेलों का इस्तेमाल बायोडीजल उत्पादन में अधिक होने लगता है। इससे बाजार में खाद्य तेल की उपलब्धता घटती है और कीमतें तेजी से बढ़ती हैं।
अभी और कितनी बढ़ सकती है महंगाई?
पेट्रोलियम मंत्रालय के अधिकारियों के मुताबिक हालिया बढ़ोतरी के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों को अभी भी रोजाना करीब 600 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है।
तेल कंपनियों का कहना है कि अब तक की बढ़ोतरी उनके कुल घाटे की केवल 10 प्रतिशत भरपाई कर पा रही है। ऐसे में आने वाले 3 से 4 महीनों तक कीमतों में और इजाफा होने की आशंका बनी हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक पश्चिम एशिया में तनाव कम नहीं होता और होर्मुज स्ट्रेट की स्थिति सामान्य नहीं होती, तब तक कच्चे तेल के दाम दबाव में रहेंगे। अमेरिका और ईरान के बीच किसी ठोस शांति समझौते के बाद ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में राहत संभव है।
सरकार के पास क्या विकल्प?
सरकार चाहे तो एक्साइज ड्यूटी में कटौती करके कुछ राहत दे सकती है। इससे पहले मार्च 2026 में भी उत्पाद शुल्क में कमी की गई थी। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि यह केवल अस्थायी राहत होगी।
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल महंगा बना रहता है, तो आम आदमी को आने वाले महीनों में और महंगाई झेलनी पड़ सकती है।
विपक्ष के आरोप
विपक्ष ने बढ़ती कीमतों को लेकर सरकार पर हमला तेज कर दिया है। विपक्षी दलों का आरोप है कि चुनाव के दौरान जानबूझकर कीमतें स्थिर रखी गईं और परिणाम आने के बाद लगातार दाम बढ़ाए जा रहे हैं।
फिलहाल आम जनता के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि राहत आखिर कब मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार अगर वैश्विक हालात सुधरते हैं तो जुलाई 2026 के बाद कुछ राहत मिल सकती है, जबकि साल के अंत तक कीमतों के सामान्य होने की उम्मीद जताई जा रही है।







