बिना दवा एंग्जायटी कंट्रोल करें: अमेरिकी डॉक्टर ने बताईं स्ट्रेस घटाने वाली 6 डेली हैबिट्स

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में स्ट्रेस और एंग्जायटी एक आम समस्या बनती जा रही है। कई बार लोग इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समय के साथ यह मानसिक और शारीरिक सेहत पर असर डाल सकती है। हालांकि हर बार एंग्जायटी से निपटने के लिए दवाइयों की जरूरत नहीं होती। एक अमेरिकी डॉक्टर के अनुसार, अगर रोजमर्रा की लाइफस्टाइल में कुछ छोटे बदलाव किए जाएं, तो बिना दवा भी एंग्जायटी को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।

एक्सपर्ट का कहना है कि जब नींद, खान-पान, मूवमेंट और स्क्रीन टाइम बैलेंस में रहते हैं, तो दिमाग अपने आप ज्यादा शांत रहने लगता है। आइए जानते हैं वो 6 डेली हैबिट्स, जो स्ट्रेस और एंग्जायटी कम करने में मदद कर सकती हैं।

1. सुबह की धूप जरूर लें

सुबह जल्दी धूप लेने से शरीर की स्लीप-वेक साइकिल सही रहती है। इससे मेलाटोनिन हार्मोन बैलेंस होता है, जो मूड सुधारने और एंग्जायटी के लक्षण कम करने में मदद करता है। रिसर्च के मुताबिक, सुबह की प्राकृतिक रोशनी में समय बिताने से पॉजिटिविटी बढ़ती है और एंग्जायटी का खतरा घटता है।

2. लंबे समय तक भूखे न रहें

ज्यादा देर तक कुछ न खाने से शरीर में स्ट्रेस हार्मोन (एड्रेनालिन और कोर्टिसोल) बढ़ सकते हैं। इससे घबराहट, दिल की धड़कन तेज होना और बेचैनी महसूस हो सकती है। समय पर और नियमित खाना खाने से ब्लड शुगर कंट्रोल में रहती है और एंग्जायटी कम होती है।

3. पूरी और अच्छी नींद लें

नींद की कमी दिमाग के इमोशनल कंट्रोल को कमजोर कर देती है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, रोजाना अच्छी क्वालिटी की नींद लेने से एंग्जायटी के लक्षणों में साफ कमी आती है, जबकि कम नींद एंग्जायटी को और बढ़ा सकती है।

4. चाय-कॉफी सीमित करें

ज्यादा कैफीन लेने से नर्वस सिस्टम जरूरत से ज्यादा एक्टिव हो जाता है, जिससे घबराहट, बेचैनी और पैनिक जैसे लक्षण बढ़ सकते हैं। खासतौर पर एंग्जायटी से जूझ रहे लोगों को कैफीन कम करने की सलाह दी जाती है। इससे नींद और मेंटल हेल्थ दोनों बेहतर होती हैं।

5. लंबे समय तक बैठे न रहें

लगातार एक ही जगह बैठे रहने से शरीर में टेंशन बढ़ती है, जो एंग्जायटी को ट्रिगर कर सकती है। काम के बीच-बीच में हल्की फिजिकल एक्टिविटी या सिर्फ 10 मिनट की वॉक भी मूड बेहतर करने में काफी मददगार होती है।

6. स्क्रीन टाइम कम करें

ज्यादा मोबाइल और सोशल मीडिया इस्तेमाल करना भी स्ट्रेस और एंग्जायटी की बड़ी वजह बन सकता है। लगातार नोटिफिकेशन, देर रात फोन चलाना और स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने से दिमाग थक जाता है। स्क्रीन टाइम लिमिट करने और कुछ समय के लिए टेक्नोलॉजी से दूरी बनाने से मेंटल वेल-बीइंग और नींद की क्वालिटी सुधरती है।

निष्कर्ष:

अगर आप रोजमर्रा की इन छोटी-छोटी आदतों को अपनाते हैं, तो बिना दवा भी एंग्जायटी और स्ट्रेस को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।

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