ईरान-इज़रायल तनाव के बीच होर्मुज स्ट्रेट बंद, क्या 80 डॉलर पार करेगा कच्चा तेल? जानें भारत पर असर

रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका और इज़रायल ने ईरान के ठिकानों पर सैन्य कार्रवाई की है। (ऐसी संवेदनशील खबरों में आधिकारिक पुष्टि और विश्वसनीय स्रोतों की जांच करना बेहद ज़रूरी होता है।)

यदि क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ता है, तो इसका सीधा असर वैश्विक तेल बाज़ार पर पड़ता है।

Strait of Hormuz क्यों है इतना अहम?
• यह ईरान और ओमान के बीच स्थित है।
• फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है।
• दुनिया के कुल समुद्री कच्चे तेल का लगभग 20% हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
• कतर जैसे बड़े एलपीजी निर्यातक देश की लगभग पूरी सप्लाई इसी मार्ग से होती है।

इसी वजह से इसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण energy chokepoints में गिना जाता है।

तेल की कीमतों पर असर

तनाव बढ़ने या सप्लाई रुकने की आशंका से:

• ट्रेडर्स पहले से ही कीमतों में जोखिम प्रीमियम जोड़ देते हैं।
• Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार,

IG Group के प्लेटफॉर्म पर

West Texas Intermediate (WTI) का दाम 75 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर गया।
• कुछ अनुमानों में 76–81 डॉलर प्रति बैरल तक जाने की संभावना जताई गई।
यदि स्ट्रेट पूरी तरह बंद होता है और सप्लाई बाधित होती है, तो कीमतें इससे भी अधिक उछल सकती हैं।

🇮🇳 भारत पर संभावित असर

भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है।

तेल महंगा होने पर:

• पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ सकते हैं
• महंगाई (Inflation) पर दबाव बढ़ सकता है
• रुपया कमजोर पड़ सकता है
• सरकार पर सब्सिडी और राजकोषीय दबाव बढ़ सकता है

होर्मुज स्ट्रेट में किसी भी प्रकार का व्यवधान वैश्विक तेल बाज़ार को तुरंत प्रभावित करता है।

हालांकि वास्तविक कीमतों का बड़ा उछाल इस बात पर निर्भर करेगा कि:

• क्या स्ट्रेट पूरी तरह बंद होता है?
• बाधा कितने समय तक रहती है?
• अन्य तेल उत्पादक देश सप्लाई बढ़ाते हैं या नहीं?

स्थिति अभी संवेदनशील है, इसलिए निवेशकों और तेल आयात करने वाले देशों की नजर लगातार घटनाक्रम पर बनी हुई है।

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