क्या आप भी घर में लगाए हैं शेर की तस्वीर? पहले जान लें ये जरूरी बातें
वास्तु शास्त्र में घर की दीवारों पर लगी तस्वीरों को बहुत महत्व दिया गया है। प्राचीन ग्रंथ जैसे समरांगणसूत्रधार, प्रासाद मण्डन और वृहत्संहिता में बताया गया है कि घर में रखी वस्तुओं और चित्रों का सकारात्मक या नकारात्मक प्रभाव वहां रहने वाले लोगों के जीवन पर पड़ता है।
अब विस्तार से समझते हैं कि घर में शेर की तस्वीर क्यों नहीं लगानी चाहिए:
1. शेर का प्रतीकात्मक अर्थ
वास्तु के अनुसार शेर आक्रामकता, शक्ति, अहंकार और क्षेत्रीय स्वभाव का प्रतीक है। जंगल में ये गुण अच्छे माने जाते हैं, लेकिन घर के शांत वातावरण के लिए ये ऊर्जा उपयुक्त नहीं मानी जाती।
घर में शेर की तस्वीर लगाने से परिवार के सदस्यों में गुस्सा, विवाद और टकराव की स्थिति बन सकती है।
2. पारिवारिक कलह और तनाव
आक्रामक जानवरों की तस्वीरें मानसिक अशांति और नकारात्मक ऊर्जा को बढ़ा सकती हैं। इससे:
• पति-पत्नी के बीच मतभेद
• परिवार में गलतफहमियां
• अनावश्यक बहस और क्लेश
जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
3. आर्थिक प्रभाव
वास्तु मान्यता के अनुसार घर में उग्र पशुओं की तस्वीर आर्थिक अस्थिरता ला सकती है। इससे धन रुकना, खर्च बढ़ना या आय में बाधा जैसी समस्याएं आ सकती हैं।
अन्य निषेध (समरांगण सूत्रधार के अनुसार)
ग्रंथों में गिद्ध, उल्लू, कबूतर, कौआ, बाज और बगुले जैसे पक्षियों की तस्वीर भी घर की दीवारों पर न लगाने की सलाह दी गई है, क्योंकि इन्हें अशुभ या अस्थिरता का प्रतीक माना गया है।
घर में कौन-सी तस्वीरें शुभ मानी जाती हैं?
वास्तु शास्त्र में कुछ पशुओं की तस्वीरें अत्यंत शुभ मानी गई हैं:
• कामधेनु (गाय) – धन, सुख और समृद्धि का प्रतीक
• सात दौड़ते घोड़े – सफलता और प्रगति
• हाथी – शक्ति और स्थिरता
• कछुआ – दीर्घायु और धैर्य
• हंस – ज्ञान और पवित्रता
• मोर – सौंदर्य और सकारात्मक ऊर्जा
इनकी तस्वीरें घर में लगाने से सकारात्मक ऊर्जा, स्थिरता, धन लाभ और शांति बनी रहती है।
शेर भले ही जंगल का राजा हो, लेकिन घर के लिए उसकी आक्रामक ऊर्जा उपयुक्त नहीं मानी जाती। इसलिए वास्तु के अनुसार घर में शेर की तस्वीर लगाने से बचना चाहिए और शांत, सौम्य तथा शुभ प्रतीकों वाली तस्वीरें लगानी चाहिए।







