Copper Price Hits Record High: ग्लोबल सप्लाई संकट के बीच कॉपर पहली बार 13,000 डॉलर प्रति टन पार
ग्लोबल मार्केट में सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंताओं, अमेरिकी टैरिफ के डर और एनर्जी ट्रांजिशन की मजबूत मांग के चलते कॉपर की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। LME पर कॉपर पहली बार 13,000 डॉलर प्रति टन तक चढ़ा, जबकि अमेरिका में बढ़ते आयात और चिली की खदान में हड़ताल ने सप्लाई जोखिम को और बढ़ा दिया है।
ग्लोबल कमोडिटी मार्केट में कॉपर की कीमतों ने नया इतिहास रच दिया है। सप्लाई संकट की आशंकाओं और निवेशकों के बढ़ते रिस्क-ऑन मूड के बीच कॉपर पहली बार 13,000 डॉलर प्रति टन के स्तर तक पहुंच गया है।
लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर बेंचमार्क कॉपर फ्यूचर्स में 4.3 फीसदी तक की तेजी दर्ज की गई। संभावित अमेरिकी टैरिफ के डर से हाल के हफ्तों में अमेरिका की ओर कॉपर शिपमेंट तेज हुई है, जिससे अन्य क्षेत्रों में उपलब्धता घट गई है।
इसी बीच चिली की मैन्टोवर्डे माइन में शुरू हुई हड़ताल ने ग्लोबल सप्लाई पर अतिरिक्त दबाव बना दिया है। ऐसे समय में जब एनर्जी ट्रांजिशन और इलेक्ट्रिफिकेशन के कारण कॉपर की मांग लगातार बढ़ रही है, सप्लाई में किसी भी तरह की रुकावट कीमतों को और ऊपर ले जा सकती है।
सोमवार को कॉपर के साथ-साथ सभी बेस मेटल्स में मजबूती देखने को मिली। टेक शेयरों में तेजी के कारण इक्विटी बाजारों में भी सकारात्मक माहौल रहा। निवेशक अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो से जुड़ी हालिया कार्रवाइयों और उनके संसाधनों पर पड़ने वाले असर का भी आकलन कर रहे हैं।
🔋 एनर्जी ट्रांजिशन बना बड़ा सहारा
एनर्जी ट्रांजिशन में अहम भूमिका निभाने वाला कॉपर साल 2025 में अब तक 42 फीसदी की तेजी दिखा चुका है, जो 2009 के बाद इसका सबसे बेहतरीन प्रदर्शन है। अमेरिका द्वारा 2026 में प्राइमरी कॉपर पर संभावित टैरिफ की समीक्षा की योजना ने आर्बिट्राज ट्रेड को फिर से सक्रिय कर दिया है, जिससे ग्लोबल सप्लाई और सख्त हो गई है।
UBS ग्रुप के एनालिस्ट्स के मुताबिक, भले ही 2025 में वैश्विक रिफाइंड कॉपर बाजार में सरप्लस रहा हो, लेकिन अमेरिकी टैरिफ नीतियों ने मेटल फ्लो और इन्वेंट्री वितरण को बिगाड़ दिया है।
⚠️ सप्लाई रिस्क अभी भी बरकरार
UBS का कहना है कि अमेरिका के पास ग्लोबल कॉपर इन्वेंट्री का लगभग 50 फीसदी हिस्सा है, जबकि उसकी मांग 10 फीसदी से भी कम है। इससे बाकी दुनिया में सप्लाई की तंगी बढ़ने का खतरा बना हुआ है।
LME पर कैश-टू-थ्री मंथ स्प्रेड का बैकवर्डेशन में रहना भी निकट अवधि में सप्लाई की कमी का संकेत देता है। चीन सिक्योरिटीज के एनालिस्ट्स का अनुमान है कि अमेरिकी टैरिफ और सप्लाई शॉर्टफॉल के चलते 2026 में वैश्विक कॉपर बाजार में 1 लाख टन से ज्यादा की कमी हो सकती है।
सोमवार दोपहर LME पर तीन महीने का कॉपर 4.2 फीसदी की तेजी के साथ 12,995 डॉलर प्रति टन पर कारोबार करता नजर आया।







