ग्रीनलैंड पर ट्रंप की धमकी से हिला वैश्विक बाजार, भारत को सोना-शेयर में मिल सकता है फायदा
भारत को कैसे होगा फायदा?
- 1. सोना-चांदी में निवेश से भारतीय निवेशकों को फायदा
ग्रीनलैंड को लेकर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव से ग्लोबल स्तर पर अनिश्चितता बढ़ी है। ऐसे माहौल में निवेशक सुरक्षित निवेश (Safe Haven) की ओर रुख करते हैं। भारत में पारंपरिक रूप से सोना और चांदी सबसे भरोसेमंद निवेश माने जाते हैं। - कीमतों में तेजी से ज्वैलरी, बुलियन ट्रेडर्स और निवेशकों को फायदा
- गोल्ड ETF और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश बढ़ सकता है
2. भारत शेयर बाजार के लिए ‘चीन प्लस वन’ का मौका
अगर अमेरिका और यूरोप के बीच ट्रेड टेंशन बढ़ता है, तो वैश्विक कंपनियां अपने सप्लाई चेन को डायवर्सिफाई करेंगी।
- भारत पहले से ही China+1 strategy का बड़ा लाभार्थी है
- मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो कंपोनेंट्स और टेक्सटाइल सेक्टर को नए ऑर्डर मिल सकते हैं
3. आईटी और फार्मा सेक्टर को सपोर्ट
यूरोप-अमेरिका तनाव बढ़ने पर कंपनियां लागत कम करने के लिए आउटसोर्सिंग बढ़ाती हैं।
- भारतीय IT कंपनियों को नए कॉन्ट्रैक्ट
- फार्मा सेक्टर को निर्यात के नए मौके
4. कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का फायदा
वैश्विक तनाव से अगर आर्थिक गतिविधियां धीमी होती हैं, तो कच्चे तेल की मांग घट सकती है।
- भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए यह बड़ा फायदा
- महंगाई पर दबाव कम होगा
- रुपये को भी स्थिरता मिल सकती है
5. विदेशी निवेश (FPI) का रुख भारत की ओर
अगर यूरोपीय बाजारों में अनिश्चितता बढ़ती है, तो निवेशक उभरते बाजारों की ओर रुख करते हैं।
- भारत की मजबूत ग्रोथ स्टोरी
- राजनीतिक स्थिरता और बड़े उपभोक्ता बाजार के कारण
- लॉन्ग टर्म FDI और FPI फ्लो बढ़ सकता है
निष्कर्ष
भले ही ट्रंप की ग्रीनलैंड धमकी से अल्पकाल में वैश्विक बाजारों में उतार-चढ़ाव देखने को मिले, लेकिन भारत के लिए यह स्थिति अवसर भी लेकर आ सकती है। सुरक्षित निवेश, मैन्युफैक्चरिंग, आईटी और निर्यात के मोर्चे पर भारत को लंबी अवधि में इसका लाभ मिलने की संभावना है।







