ईरान वॉर का असर: 10 मिनट में शेयर बाजार से 12 लाख करोड़ साफ

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और संभावित ईरान युद्ध की आशंकाओं ने सोमवार को भारतीय शेयर बाजार को हिला दिया। हफ्ते के पहले ही दिन बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों को बड़ा नुकसान झेलना पड़ा।

बाजार की शुरुआत में ही बड़ी गिरावट

सोमवार सुबह कारोबार शुरू होते ही बाजार में तेज बिकवाली देखने को मिली।

• BSE Sensex शुरुआती कारोबार में करीब 2,400 अंक तक गिर गया।
• वहीं Nifty 50 करीब 692 अंक गिरकर 23,753.85 के स्तर पर कारोबार करता दिखा।

इस तेज गिरावट का असर निवेशकों की संपत्ति पर भी पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक सिर्फ 10 मिनट में लगभग 12.39 लाख करोड़ रुपये का मार्केट वैल्यू साफ हो गया।

मार्केट कैपिटलाइजेशन में बड़ी गिरावट

रिपोर्ट के अनुसार Bombay Stock Exchange का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन गिरकर लगभग 437 लाख करोड़ रुपये के आसपास आ गया।

गिरावट की मुख्य वजह

विशेषज्ञों के अनुसार बाजार में गिरावट की सबसे बड़ी वजह वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते संकट के कारण निवेशक सतर्क हो गए हैं।
इसके साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में भी तेज उछाल आया है।

• वैश्विक तेल मानक Brent Crude की कीमत 114 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई, जो 2022 के बाद पहली बार हुआ।

तेल महंगा होने से उन सेक्टरों पर सबसे ज्यादा दबाव पड़ता है जिनकी लागत ईंधन पर निर्भर होती है।

एविएशन सेक्टर को सबसे ज्यादा नुकसान

तेल की कीमत बढ़ने का सबसे बड़ा असर एविएशन सेक्टर पर देखने को मिला।

• InterGlobe Aviation (इंडिगो) का शेयर करीब 7.7% गिरकर 4,065 रुपये के आसपास पहुंच गया।
• SpiceJet के शेयर भी लगभग 5% तक टूट गए।

एयरलाइंस कंपनियों के लिए ईंधन सबसे बड़ा खर्च होता है, इसलिए तेल महंगा होने पर इन कंपनियों के मुनाफे पर सीधा असर पड़ता है।

बैंकिंग सेक्टर में भी भारी बिकवाली

बाजार में गिरावट का असर बैंकिंग शेयरों पर भी साफ दिखाई दिया।

• State Bank of India का शेयर लगभग 5.9% गिर गया।
• Shriram Finance करीब 5.6% टूट गया।
• Axis Bank लगभग 3.7% गिरा।
• ICICI Bank करीब 3.6% नीचे आ गया।

आगे बाजार का रुख क्या रहेगा

विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा दो बड़े कारकों पर निर्भर करेगी:

1. विदेशी निवेशकों (FII) का निवेश रुख
2. कच्चे तेल की कीमतों की चाल

अगर मिडिल ईस्ट का तनाव और बढ़ता है या तेल की कीमतें ऊंची रहती हैं, तो दलाल स्ट्रीट पर उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

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