अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 91 के पास पहुंचा रुपया, 50 साल में कब कितना टूटा और आगे क्या होगा?
Dollar vs Rupee: भारतीय रुपया एक बार फिर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होता दिख रहा है। साल 2026 की शुरुआत में रुपया 90–91 के स्तर के आसपास कारोबार कर रहा है। पिछले साल 2025 में रुपये में करीब 3.5% की गिरावट दर्ज की गई थी, जिससे यह एशिया की कमजोर मुद्राओं में शामिल हो गया। रुपये की गिरावट सरकार, रिजर्व बैंक और आम लोगों—तीनों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है।
भारत अपने ज्यादातर आयात का भुगतान डॉलर में करता है। ऐसे में जब रुपया कमजोर होता है, तो एक डॉलर खरीदने के लिए ज्यादा रुपये चुकाने पड़ते हैं, जिसका सीधा असर महंगाई, व्यापार घाटे और आम आदमी की जेब पर पड़ता है।
क्यों गिरता है रुपया?
भारत जब विदेश से कच्चा तेल, गैस, इलेक्ट्रॉनिक्स या मशीनरी मंगाता है, तो भुगतान आमतौर पर डॉलर में होता है।
जब डॉलर मजबूत होता है और रुपया कमजोर, तो आयात महंगा हो जाता है।
रुपये की कमजोरी के पीछे मुख्य कारण हैं:
• 🌍 वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और युद्ध जैसे हालात
• 🇺🇸 अमेरिका की सख्त व्यापार नीतियां और ऊंचे टैरिफ
• 📉 विदेशी निवेशकों (FII) की भारत से निकासी
• 🛢️ कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव
• 💵 डॉलर की वैश्विक मजबूती
हालांकि, भारत की अर्थव्यवस्था आज पहले से कहीं ज्यादा मजबूत है और विदेशी मुद्रा भंडार भी रिकॉर्ड स्तर के करीब है।
50 साल में कब कितना टूटा भारतीय रुपया?
साल 1 डॉलर के मुकाबले रुपया
1975 ₹8.4
1985 ₹12.6
1991 ₹17.9 (आर्थिक संकट)
2000 ₹44
2008 ₹48
2013 ₹68 (टेपर्ड टैंट्रम)
2018 ₹74
2020 ₹76
2022 ₹83
2024 ₹87
2025 ₹90
2026 ₹90–91 (मौजूदा स्तर)
➡️ साफ है कि बीते 50 सालों में रुपया लगातार कमजोर हुआ है, हालांकि इसकी रफ्तार अलग-अलग समय पर अलग रही है।
रुपये के गिरने का क्या असर पड़ता है?
❌ नकारात्मक असर
• आयात महंगा होता है
• पेट्रोल-डीजल और गैस की कीमतों पर दबाव
• विदेश में पढ़ाई और यात्रा महंगी
• विदेशी कर्ज लेने वाली कंपनियों का बोझ बढ़ता है
• महंगाई बढ़ने की आशंका
✅ सकारात्मक असर
• निर्यातकों को फायदा
• आईटी और फार्मा कंपनियों की कमाई बढ़ती है
• विदेश में काम करने वाले भारतीयों की रेमिटेंस का मूल्य बढ़ता है
आगे कितना टूटेगा रुपया?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार:
• 📊 2026 में रुपया 90–92 प्रति डॉलर के दायरे में रह सकता है
• 🤝 अगर भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील होती है और टैरिफ तनाव घटता है, तो
• 📈 रुपया 86–88 के स्तर तक मजबूत हो सकता है
आरबीआई के पास मजबूत विदेशी मुद्रा भंडार है, जिससे अत्यधिक गिरावट की संभावना फिलहाल कम मानी जा रही है।
निष्कर्ष
रुपये की कमजोरी नई बात नहीं है, लेकिन वैश्विक हालात के कारण इसका असर ज्यादा महसूस हो रहा है। आने वाला समय इस बात पर निर्भर करेगा कि वैश्विक तनाव, अमेरिकी नीतियां और भारत की आर्थिक रणनीति किस दिशा में जाती है।







