Holashtak 2026: होली से पहले होलाष्टक के भयंकर 8 दिन! घर में हैं छोटे बच्चे तो इन बातों का रखें ध्यान

Holashtak 2026 Start and End Date: 24 फरवरी से 3 मार्च 2026 तक होलाष्टक रहेगा। होलाष्टक के 8 दिनों की अवधि को पारंपरिक रूप से अशुभ और नकारात्मक ऊर्जा का समय माना जाता है। ऐसे में जिन घरों में छोटे बच्चे हों, वहां विशेष सावधानी रखने की सलाह दी जाती है।

होलाष्टक क्या है?

होलाष्टक, फाल्गुन शुक्ल पक्ष की अष्टमी से शुरू होकर Holi के पहले दिन होने वाले Holika Dahan तक चलता है। मान्यता है कि इन आठ दिनों में ग्रहों की स्थिति उग्र रहती है, इसलिए विवाह, मुंडन, गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्य नहीं किए जाते।

हालांकि ये मान्यताएं धार्मिक परंपराओं पर आधारित हैं, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं—बस सावधानी और सजगता जरूरी है।

होलाष्टक 2026 में बच्चों के लिए जरूरी सावधानियां
1. शाम के बाद बाहर न छोड़ें

छोटे बच्चों को सूर्यास्त के बाद अकेले बाहर न जाने दें। संभव हो तो अंधेरा होने के बाद उन्हें घर के अंदर ही रखें।

2. काला टीका लगाएं (परंपरा अनुसार)

मान्यता के अनुसार बच्चों को बुरी नजर से बचाने के लिए काला टीका लगाया जाता है।

3. कपड़ों का ध्यान रखें

सूर्यास्त के बाद बच्चों के कपड़े बाहर या छत पर न सुखाएं।

बाहर से खेलने आने पर तुरंत कपड़े बदलवाएं।

हाथ-पैर अच्छी तरह धुलवाएं।

4. चौराहे पर अधिक देर न रुकें

चार रास्तों वाले स्थान (चौराहा) पर बच्चों के साथ ज्यादा देर तक न ठहरें।

5. नजर दोष से बचाव

यदि बच्चा अचानक चिड़चिड़ा हो जाए या स्वभाव में बदलाव दिखे, तो पारंपरिक उपाय जैसे नमक, लाल मिर्च या पीली सरसों से नजर उतार सकते हैं।

6. मांगलिक कार्य टालें

होलाष्टक के दौरान बच्चों का नामकरण, मुंडन, कर्णवेध या अन्नप्राशन जैसे संस्कार न करें। ये कार्य होली के बाद करना शुभ माना जाता है।

होलाष्टक को लेकर अत्यधिक भयभीत होने की जरूरत नहीं है। यह आस्था और परंपरा से जुड़ा समय है। यदि घर में छोटे बच्चे हैं तो बस साफ-सफाई, सुरक्षा और पारंपरिक मान्यताओं का संतुलित रूप से पालन करें।

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