भारतीय फुटबॉल पर बड़ा खतरा, ISL को लेकर सुनील छेत्री सहित खिलाड़ियों की FIFA से अपील
इंडियन सुपर लीग (ISL) को बचाने के लिए अब फुटबॉल खिलाड़ियों ने खुलकर मोर्चा संभाल लिया है। भारत के दिग्गज फुटबॉलर सुनील छेत्री समेत कई भारतीय और विदेशी खिलाड़ियों ने विश्व फुटबॉल की सर्वोच्च संस्था फीफा से इस लीग के अस्तित्व को बचाने की भावुक अपील की है। खिलाड़ियों की इस सामूहिक पहल ने एक बार फिर भारत में फुटबॉल की जमीनी हकीकत और उससे जुड़े गंभीर संकट को उजागर कर दिया है।
नई दिल्ली: इंडियन सुपर लीग के भविष्य पर मंडराते संकट के बीच खिलाड़ियों की चिंता अब खुलकर सामने आ गई है। ISL के अस्तित्व को बचाने के लिए भारतीय फुटबॉल के सीनियर खिलाड़ियों ने फीफा से सीधे हस्तक्षेप की मांग की है। भारतीय टीम के पूर्व कप्तान सुनील छेत्री, अनुभवी गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू और डिफेंडर संदेश झिंगन सहित कई नामचीन खिलाड़ियों ने ISL के निलंबन और 2025-26 सत्र की शुरुआत न हो पाने पर गहरी चिंता जताई है।
आईएसएल में लंबे समय से बनी अनिश्चितता ने खिलाड़ियों के करियर, फिटनेस और भविष्य की योजनाओं को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। यही वजह है कि खिलाड़ियों ने सोशल मीडिया के जरिए एक संयुक्त वीडियो संदेश जारी कर फीफा से अपील की। इस वीडियो में भारतीय खिलाड़ियों के साथ-साथ लीग में खेलने वाले कई विदेशी फुटबॉलर्स भी नजर आए, जिन्होंने ISL को भारतीय फुटबॉल की रीढ़ बताया।
गुरप्रीत सिंह संधू ने अपने बयान में कहा,
“जनवरी का महीना चल रहा है और इस वक्त हमें आईएसएल के प्रतिस्पर्धी मैचों में मैदान पर होना चाहिए था। फैंस को अपनी स्क्रीन पर हमें खेलते देखना चाहिए था, लेकिन हकीकत इससे बिल्कुल अलग है।”
वहीं संदेश झिंगन ने भावुक लहजे में कहा,
“हम डर और बेबसी के साथ वह बातें कहने को मजबूर हैं, जिन्हें हम सभी लंबे समय से जानते हैं, लेकिन अब चुप रहना संभव नहीं है।”
सुनील छेत्री ने भी ISL के रुकने को भारतीय फुटबॉल के लिए बेहद खतरनाक करार दिया। उन्होंने कहा कि ISL सिर्फ एक लीग नहीं, बल्कि हजारों खिलाड़ियों, कोचों, स्टाफ और युवा फुटबॉलरों के सपनों से जुड़ी हुई है। लीग के ठप होने से न केवल घरेलू फुटबॉल बल्कि राष्ट्रीय टीम का भविष्य भी खतरे में पड़ सकता है।
खिलाड़ियों का मानना है कि ISL ने भारत में फुटबॉल को एक नई पहचान दी है। इस लीग के जरिए कई युवा खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचने का मौका मिला। ऐसे में अगर यह लीग बंद होती है या लंबे समय तक निलंबित रहती है, तो भारतीय फुटबॉल दशकों पीछे चला जाएगा।
फीफा से की गई इस अपील में खिलाड़ियों ने मांग की है कि वह इस पूरे मामले में हस्तक्षेप करे और भारतीय फुटबॉल महासंघ (AIFF) तथा संबंधित पक्षों के साथ मिलकर समाधान निकाले। खिलाड़ियों ने साफ कहा कि अगर जल्द फैसला नहीं लिया गया, तो भारतीय फुटबॉल “स्थायी ठहराव” की स्थिति में पहुंच सकता है, जिससे उबरना बेहद मुश्किल होगा।
इस पूरे घटनाक्रम ने खेल जगत में हलचल मचा दी है। अब सभी की नजरें फीफा और भारतीय फुटबॉल से जुड़े शीर्ष संगठनों पर टिकी हैं कि वे ISL को बचाने के लिए क्या कदम उठाते हैं।







