पुरी के जगन्नाथ मंदिर की रहस्यमयी घटनाएँ

पुरी के जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी एक रहस्यमयी घटना हाल ही में सुर्खियों में आई है। सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें देखा जा सकता है कि मंदिर के ध्वज के साथ एक बड़ी चील मंदिर के चारों ओर घूम रही है। यह नजारा देखकर लोग हैरान रह गए हैं और चर्चा कर रहे हैं कि कहीं यह किसी अनहोनी का संकेत तो नहीं। इस घटना के अलावा, मंदिर से जुड़ी कई और रहस्यमयी बातें हैं, जो सुनने पर किसी भी व्यक्ति को आश्चर्यचकित कर सकती हैं।

जगन्नाथ मंदिर, जो हिन्दुओं के चार धामों में से एक माना जाता है, ओडिशा के तटवर्ती शहर पुरी में स्थित है। यह मंदिर भगवान विष्णु के अवतार श्री कृष्ण को समर्पित है और हर साल लाखों श्रद्धालु दुनियाभर से दर्शन करने आते हैं। 800 साल से भी अधिक पुराने इस मंदिर से जुड़ी कई चमत्कारी और रहस्यमयी घटनाएँ प्रचलित हैं।

एक मान्यता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण ने अपने देह का त्याग इसी मंदिर में किया था। उनका शरीर पांच तत्वों में विलीन हो गया, लेकिन उनके हृदय का हिस्सा आज भी मंदिर में मौजूद लकड़ी की प्रतिमा में धड़क रहा है। मंदिर में आने वाले भक्तों ने यह भी बताया है कि जब तक आप सिंहद्वार में कदम नहीं रखते, तब तक समुद्र की लहरों की आवाज़ें सुनाई देती हैं, लेकिन जैसे ही आप मंदिर के अंदर प्रवेश करते हैं, ये आवाज़ें अचानक बंद हो जाती हैं।

जगन्नाथ मंदिर के शीर्ष पर लगे झंडे से भी कई रहस्य जुड़े हैं। कहा जाता है कि यह झंडा हवा की विपरीत दिशा में उड़ता है और इसे हर दिन बदलना अनिवार्य है। यदि किसी दिन झंडा नहीं बदला गया, तो मंदिर 18 साल तक बंद कर दिया जाएगा। पुराना झंडा बुरी ऊर्जा को खींचता है, इसलिए इसे हटाना जरूरी होता है।

मंदिर की रसोई से भी एक अद्भुत रहस्य जुड़ा है। यहां जो भी प्रसाद बनाया जाता है, वह सात मिट्टी के बर्तनों में तैयार किया जाता है। हैरानी की बात यह है कि सबसे पहले प्रसाद सातवें बर्तन में बनता है और फिर क्रमशः छठे, पांचवें, चौथे, तीसरे, दूसरे और अंत में पहले बर्तन में तैयार होता है।

जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर एक सुदर्शन चक्र लगा हुआ है। इसे किसी भी दिशा से देखा जा सकता है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि चक्र हमेशा आपकी तरफ मुख करके है। इसके अलावा, मंदिर के शिखर की छाया भी हमेशा अदृश्य रहती है और जमीन पर कभी दिखाई नहीं देती।

पुरी पहुंचने का मार्ग

हवाई मार्ग से: सबसे नजदीकी हवाई अड्डा भुवनेश्वर है, जो पुरी से लगभग 60 किलोमीटर दूर है। वहां से टैक्सी या बस के माध्यम से सीधे पुरी पहुंचा जा सकता है।

रेल मार्ग से: पुरी रेलवे स्टेशन देश के कई प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और हैदराबाद से जुड़ा हुआ है। रेलवे स्टेशन से जगन्नाथ मंदिर लगभग 3-4 किलोमीटर दूर है, जिसे आप ऑटो, टैक्सी या रिक्शा से आसानी से पहुँच सकते हैं।

सड़क मार्ग से: पुरी सड़क मार्ग से भुवनेश्वर और अन्य शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। भुवनेश्वर से पुरी की दूरी लगभग 60 किलोमीटर है और वहां से बसें और टैक्सियां नियमित रूप से चलती हैं।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी में निहित सटीकता या विश्वसनीयता की गारंटी नहीं दी जा सकती। हमारा उद्देश्य केवल सूचना प्रदान करना है और यूजर्स इसे महज जानकारी के रूप में ही लें।

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