माघ मेला 2026: हड्डी चबाते अघोरी से 36 साल से बिना नहाए बाबा तक, हैरान कर देने वाले वीडियो वायरल
Magh Mela 2026 Viral Video: प्रयागराज में शुरू हुआ माघ मेला सिर्फ आस्था का संगम नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अजीबोगरीब साधु-संतों की वजह से चर्चा का केंद्र भी बन गया है। इस बार मेले में ऐसे बाबा नजर आ रहे हैं, जिनकी साधना और जीवनशैली लोगों को हैरान कर रही है।
माघ मेला 2026 की भव्य शुरुआत के साथ ही कई चौंकाने वाले वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। कहीं अघोरी साधु हड्डी चबाते दिख रहे हैं, तो कहीं कोई बाबा पिछले 36 सालों से न नहाने का दावा कर रहा है। कोई बर्फ की सिल्ली पर बैठकर तपस्या कर रहा है, तो कोई एक पैर पर खड़े होकर वर्षों से साधना में लीन है।
आइए जानते हैं ऐसे ही 4 वायरल साधु-संतों के बारे में 👇
🦴 हड्डी चबाते अघोरी साधु का वीडियो
प्रयागराज माघ मेले से एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है, जिसमें एक अघोरी साधु हड्डी चबाते नजर आ रहे हैं। जब उनसे पूछा गया कि अन्य साधु-संत जहां भजन-पूजन और तपस्या करते हैं, वहीं वे ऐसा क्यों कर रहे हैं, तो अघोरी ने कहा कि वे भी साधना करते हैं।
उनका कहना है कि रात तीन बजे वे भी भाव-भजन में लीन रहते हैं और यह सब उनकी साधना का ही हिस्सा है।
🧘♂️ 3 फुट 8 इंच के बाबा, जिन्हें कहा जा रहा है दुनिया का सबसे छोटा बाबा
माघ मेले में आए एक बाबा सोशल मीडिया पर खासे चर्चा में हैं, जिनकी हाइट सिर्फ 3 फुट 8 इंच बताई जा रही है। लोग उन्हें दुनिया का सबसे छोटा बाबा कह रहे हैं।
इनका नाम गंगापुरी महाराज है और वे अपनी उम्र 58 साल बताते हैं।
गंगापुरी महाराज खुद को अर्धनारीश्वर का उपासक बताते हैं और एक हाथ में चूड़ी-कंगन पहने नजर आते हैं।
🚿 36 साल से न नहाने का दावा
गंगापुरी महाराज का दावा है कि वे पिछले 36 वर्षों से स्नान नहीं किए हैं। उनके अनुसार यह उनकी साधना का हिस्सा है।
नहाने के बजाय वे अपने शरीर पर राख (भस्म) लगाते हैं और इसी से शुद्धि मानते हैं। उनका यह दावा लोगों के बीच चर्चा और हैरानी का विषय बना हुआ है।
🦶 7 सालों से एक पैर पर खड़े होकर कर रहे हैं तपस्या
माघ मेला 2026 में पहुंचे 26 वर्षीय नागा बाबा शंकरपुरी भी लोगों को चौंका रहे हैं। यूपी के सीतापुर जिले के नैमिषारण्य से आए शंकरपुरी पिछले 7 सालों से एक पैर पर खड़े होकर तपस्या कर रहे हैं।
उन्होंने अक्षय वट मार्ग के किनारे अपनी कुटिया बनाई है, जहां झूले के सहारे वे एक पैर पर संतुलन बनाए रखते हैं। उनकी कठिन साधना को देखने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन करने पहुंच रहे हैं।







