जहां कभी लैंडमाइन विस्फोट में शहीद हुए थे जवान, आज उसी भीम बांध जंगल से मुख्यालय तक दौड़ेगी सरकारी बस
मुंगेर जिले के नक्सल प्रभावित भीम बांध जंगल क्षेत्र में पहली बार सरकारी बस सेवा शुरू हुई है। 5 जनवरी 2005 के नक्सली हमले के बाद वर्षों तक विकास से कटे रहे इस इलाके को अब मुख्यधारा से जोड़ा जा रहा है। यह कदम स्थानीय ग्रामीणों, छात्रों और मरीजों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है।
मुंगेर (बिहार):
मुंगेर जिले से एक ऐतिहासिक और सकारात्मक बदलाव की तस्वीर सामने आई है। कभी नक्सलियों का गढ़ माने जाने वाले भीम बांध जंगल क्षेत्र में अब विकास की नई सुबह दिखाई दे रही है। 5 जनवरी 2005 को हुए भीषण नक्सली हमले के करीब 20 साल बाद इस दुर्गम इलाके को पहली बार बस सेवा से जोड़ा गया है।
भीम बांध वही इलाका है, जहां नक्सलियों ने लैंडमाइन विस्फोट कर तत्कालीन एसपी सहित पांच जवानों की निर्मम हत्या कर दी थी। इस घटना के बाद यह पूरा क्षेत्र लंबे समय तक विकास की मुख्यधारा से कट गया था। डर, दुर्गमता और सुरक्षा कारणों से यहां परिवहन सुविधाएं लगभग ठप हो गई थीं।
नक्सल प्रभावित इलाके में विकास की दस्तक
खड़गपुर अनुमंडल के अंतर्गत आने वाला भीम बांध जंगल क्षेत्र वर्षों तक नक्सल प्रभावित रहा। लेकिन बिहार सरकार के लगातार नक्सल विरोधी अभियानों, युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की योजनाओं, जंगलों में पुलिस कैंपों की स्थापना और आदिवासी गांवों तक सड़क निर्माण जैसे प्रयासों ने अब हालात बदल दिए हैं।
पहली बार शुरू हुई बस सेवा
अब बिहार राज्य पथ परिवहन निगम ने मुंगेर से भीम बांध के लिए नियमित बस सेवा शुरू कर दी है। यह पहल स्थानीय भाजपा विधायक कुमार प्रणय की मांग पर की गई है। साथ ही उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी द्वारा भीम बांध को विश्व पर्यटन मानचित्र पर लाने की तैयारी के बीच यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है।
ग्रामीणों को मिलेगी बड़ी राहत
इस बस सेवा से जंगल और पहाड़ी इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को अब जिला मुख्यालय तक पहुंचने में आसानी होगी। इलाज, पढ़ाई और रोजमर्रा के कामों के लिए अब उन्हें लंबा और जोखिम भरा पैदल सफर नहीं करना पड़ेगा। यह सेवा न सिर्फ आवागमन को आसान बनाएगी बल्कि क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास को भी गति देगी।







