चैती छठ 2026: नहाय-खाय के साथ शुरू हुआ महापर्व, आज कद्दू-भात का पवित्र प्रसाद
लोक आस्था का महान पर्व चैती छठ पूजा आज नहाय-खाय के साथ विधिवत शुरू हो गया है। चार दिनों तक चलने वाले इस पवित्र पर्व में सूर्य देव और छठी मईया की आराधना की जाती है। आज के दिन व्रती पवित्र स्नान के बाद सात्विक भोजन ग्रहण कर व्रत का संकल्प लेते हैं।
नहाय-खाय का महत्व
नहाय-खाय छठ पूजा का पहला और बेहद अहम दिन होता है।
• ‘नहाय’ का अर्थ है पवित्र स्नान
• ‘खाय’ का अर्थ है सात्विक भोजन ग्रहण करना
इस दिन व्रती सुबह नदी, तालाब या घर में गंगाजल मिलाकर स्नान करते हैं। इसके बाद घर की विशेष साफ-सफाई की जाती है और पूरी तरह शुद्ध वातावरण में प्रसाद तैयार किया जाता है।
आज के प्रसाद में मुख्य रूप से शामिल होता है:
• अरवा चावल का भात
• कद्दू की सब्जी
• चना दाल
• शुद्ध घी का प्रयोग
खास ध्यान:
• लहसुन-प्याज का इस्तेमाल नहीं किया जाता
• प्रसाद पूरी सात्विकता और पवित्रता के साथ बनाया जाता है
सबसे पहले भगवान को भोग लगाया जाता है, उसके बाद व्रती इसे ग्रहण करते हैं और फिर परिवार के अन्य सदस्य प्रसाद लेते हैं।
चार दिनों का पूरा क्रम
छठ महापर्व चार दिनों तक चलता है, जिसमें हर दिन का विशेष महत्व होता है:
पहला दिन: नहाय-खाय
व्रत की शुरुआत, शुद्धता और संकल्प का दिन
दूसरा दिन: खरना
• व्रती दिनभर उपवास रखते हैं
• शाम को गुड़ की खीर और रोटी का प्रसाद
• इसके बाद 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू
तीसरा दिन: संध्या अर्घ्य
• अस्त होते सूर्य को अर्घ्य
• घाटों पर भव्य पूजा और दीप सज्जा
चौथा दिन: उषा अर्घ्य
• उगते सूर्य को अर्घ्य
• व्रत का पारण और समापन
आस्था, अनुशासन और प्रकृति का पर्व
चैती छठ सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि यह प्रकृति, शुद्धता और अनुशासन का प्रतीक है। इस पर्व में व्रती 36 घंटे तक कठिन निर्जला व्रत रखते हैं और पूरे नियम-कायदे के साथ पूजा करते हैं।
यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है, लेकिन अब देशभर में इसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है।
विशेष मान्यता
मान्यता है कि छठ व्रत करने से:
• परिवार में सुख-समृद्धि आती है
• संतान की लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य की कामना पूरी होती है
• जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और शुद्धता बढ़ती है







