खंडित भगवान की मूर्ति का विसर्जन करना चाहिए या नहीं? जानिए क्या कहते हैं धर्माचार्य
घर में भगवान की मूर्ति का टूट जाना अक्सर भक्तों को असमंजस में डाल देता है। क्या खंडित मूर्ति का विसर्जन करना सही है या उसे सम्मानपूर्वक रखना चाहिए? इस सवाल पर फरीदाबाद के महंत स्वामी कामेश्वरानंद वेदांताचार्य ने स्पष्ट मार्गदर्शन दिया है।
घर में स्थापित भगवान की मूर्ति श्रद्धा और आस्था का प्रतीक होती है। कई बार अनजाने में मूर्ति से टूट-फूट हो जाती है, जिसके बाद भक्तों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या ऐसी खंडित मूर्ति का विसर्जन कर देना चाहिए।
इस विषय पर फरीदाबाद के महंत स्वामी कामेश्वरानंद वेदांताचार्य का कहना है कि मूर्ति को भगवान का स्वरूप मानकर घर में स्थापित किया जाता है। ऐसे में उसके टूट जाने पर उसे त्याग देना या नदी में बहा देना उचित नहीं माना जाता।
महंत बताते हैं कि खंडित मूर्ति का विसर्जन करने से आस्था का भाव कमजोर हो सकता है। भगवान को अपना मानने वाले भक्तों को हर परिस्थिति में उनका सम्मान बनाए रखना चाहिए। जैसे परिवार के किसी सदस्य को चोट लगने पर उसे छोड़ा नहीं जाता, उसी तरह भगवान की मूर्ति टूट जाए तो भी उसे प्रेमपूर्वक संभालना चाहिए।
स्वामी कामेश्वरानंद वेदांताचार्य के अनुसार, टूटी हुई मूर्ति के हिस्से को हल्दी या चूने से सहेजा जा सकता है। कुछ समय तक उसी रूप में पूजा करने से मन को शांति मिलती है और श्रद्धा बनी रहती है।
उन्होंने यह भी कहा कि पूजा में सबसे महत्वपूर्ण तत्व भावना होती है। यदि मन में श्रद्धा और सम्मान हो, तो खंडित मूर्ति भी पूजा में किसी प्रकार की बाधा नहीं बनती। भगवान प्रेम से की गई सेवा से प्रसन्न होते हैं, न कि बाहरी स्वरूप से।
महंत का मानना है कि मूर्ति टूटने पर घबराने या भयभीत होने की जरूरत नहीं है। उसे सम्मान के साथ रखना ही सच्ची श्रद्धा और संस्कारों की पहचान है।







